क्या है पूरा मामला?
35वीं SCOVA बैठक में रक्षा मंत्रालय और रक्षा लेखा विभाग (CGDA) से OROP से जुड़े एक लंबित एजेंडा पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया था। जवाब में रक्षा मंत्रालय का रुख बिल्कुल स्पष्ट था — मंत्रालय ने कहा कि OROP-III से जुड़े आदेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं, इस पर सभी संबंधित पक्षों से विस्तृत चर्चा हो चुकी है, और सुप्रीम कोर्ट भी इस योजना को वैध ठहरा चुका है। इसलिए इस एजेंडा आइटम को अब बंद माना जाए।
OROP आखिर है क्या?
OROP यानी One Rank One Pension। सरल भाषा में समझें तो अगर सेना के दो जवान या अधिकारी एक ही रैंक और समान सेवा अवधि के साथ रिटायर हुए हैं, तो उनकी पेंशन भी समान होनी चाहिए — चाहे वे अलग-अलग वर्षों में रिटायर हुए हों।
उदाहरण के लिए, अगर दो सूबेदार 28 साल की सेवा के बाद रिटायर हुए हैं, तो सिर्फ इसलिए उनकी पेंशन में अंतर नहीं होना चाहिए कि एक 2010 में रिटायर हुआ और दूसरा 2020 में। यही OROP का मूल सिद्धांत है।
CGDA ने बैठक में क्या जानकारी दी?
Controller General of Defence Accounts (CGDA) की ओर से बैठक में बताया गया कि:
- OROP-III के आदेश जुलाई 2024 में जारी किए जा चुके हैं
- इसके बाद सितंबर 2024 में भी संबंधित स्पष्टीकरण जारी किए गए
- आदेश जारी करने से पहले सभी हितधारकों से चर्चा की गई थी
- सुप्रीम कोर्ट भी OROP योजना को सही ठहरा चुका है
इन्हीं बिंदुओं के आधार पर रक्षा मंत्रालय ने इस मुद्दे को नीति स्तर पर बंद मानने की बात कही।
OROP-III क्या है?
OROP को समय-समय पर संशोधित किया जाता है, ताकि पुराने और नए पेंशनरों के बीच के अंतर को कम किया जा सके। OROP-III इसी संशोधन प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसके तहत कई पूर्व सैनिकों और पारिवारिक पेंशनभोगियों की पेंशन में बदलाव किया गया था। इसके लिए केंद्र सरकार पहले भी हजारों करोड़ रुपये के एरियर और संशोधित पेंशन भुगतान को मंजूरी दे चुकी है।
पूर्व सैनिक संगठनों की प्रमुख मांगें
सरकार ने भले ही इस मुद्दे को बंद मानने की बात कही हो, लेकिन पूर्व सैनिक संगठनों की ओर से समय-समय पर कुछ मांगें उठती रही हैं:
| मांग | विवरण |
|---|---|
| समय पर पेंशन संशोधन | हर संशोधन का लाभ जल्दी मिले |
| विसंगतियों का समाधान | समान रैंक वालों की पेंशन में अंतर खत्म हो |
| एरियर भुगतान | लंबित भुगतान समय पर मिले |
| पारिवारिक पेंशन | आश्रितों को भी समान लाभ मिले |
कई पूर्व सैनिक संगठन लगातार यह सुनिश्चित करने की मांग करते रहे हैं कि OROP का मूल उद्देश्य पूरी तरह लागू हो।
इस फैसले का असर किन-किन पर पड़ता है?
OROP का सीधा फायदा सेना के पूर्व सैनिकों, युद्ध विधवाओं और पारिवारिक पेंशनभोगियों को मिलता है। भारत में लाखों रक्षा पेंशनर और उनके आश्रित इस योजना के दायरे में आते हैं। OROP लागू होने के बाद कई चरणों में पेंशन संशोधन और एरियर भुगतान किए जा चुके हैं।
आगे क्या होगा?
फिलहाल SCOVA बैठक के रिकॉर्ड के अनुसार, रक्षा मंत्रालय इस मामले को निपटा हुआ मान रहा है। यानी OROP-III से जुड़े नीति संबंधी मुद्दे पर सरकार की ओर से किसी नए बदलाव का फिलहाल कोई संकेत नहीं है। हालांकि, पेंशन से जुड़े व्यक्तिगत मामलों, गणना संबंधी विसंगतियों या भुगतान से जुड़ी शिकायतें अलग प्रक्रिया के तहत आगे भी जारी रह सकती हैं।
निष्कर्ष
35वीं SCOVA बैठक में हुई चर्चा से यह साफ हो गया है कि सरकार फिलहाल OROP-III को अंतिम रूप से लागू मान रही है। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि सभी पक्षों से चर्चा और सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद इस विषय पर नीति स्तर पर अब कोई लंबित मामला नहीं बचता। ऐसे में पूर्व सैनिकों के लिए आगे सबसे अहम बात यही होगी कि वे अपनी पेंशन भुगतान, व्यक्तिगत विसंगतियों के समाधान और भविष्य में होने वाले संशोधनों पर नजर बनाए रखें।
Disclaimer: यह जानकारी उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। पेंशन से जुड़े व्यक्तिगत मामलों के लिए संबंधित विभाग या रक्षा मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट से जानकारी अवश्य लें।
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